झारखण्ड विज्ञान एवं प्रावैधिकी परिषद् से संबंधित अद्यतन स्थिति


झारखण्ड सरकार ने राज्य के निवासियों के बीच वैज्ञानिक सोंच बढ़ाने, गरीबी, पिछड़ापन तथा बेरोजगारी को दूर करने तथा राज्य की प्राकृतिक संसाधनों एवं संपदाओं का अधिकतम उपयोग करने के उद्देश्य से राजकीय संकल्प सं0 470 दिनांक 26.04.2001 के द्वारा झारखण्ड विज्ञान एवं प्रावैधिकी परिषद् का गठन किया गया है। यह एक स्वशासी संस्था है तथा इसका निबंधन सोसाईटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860(IX) के अन्तर्गत किया गया है।

परिषद् के अंग

परिषद् के दों अंग हैं यथा (1) सामान्य परिषद् एवं (2) कार्यकारिणी समिति।
(1)  सामान्य परिषद्
        सामान्य परिषद् के अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री हैं, जबकि मंत्री, विज्ञान एवं प्रावैधिकी पदेन उपाध्यक्ष हैं। सामान्य परिषद में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को छोड़कर....25..........सदस्य मनोनित हैं।
(2)  परिषद् की कार्यकारिणी समिति
        यह एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति है। परिषद् द्वारा विभिन्न परियोजनाओं तथा उनके अन्य कार्यकलापों पर सीधा नियंत्रण कार्यकारिणी समिति का है। सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियाँ भी निहित है। मंत्री, विज्ञान एवं प्रावैधिकी इसके पदेन अध्यक्ष हैं। विकास आयुक्त उपाध्यक्ष एवं सचिव, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग सदस्य सचिव हैं। कार्यकारिणी समिति के सदस्यों (पदेन सदस्यों को छोड़कर) कार्यावधि तीन वर्षों की है।
         परिषद् के लिए कुल 16 पदों का सृजन पदवर्ग समिति झारखंड द्वारा स्वीकृत किया गया है।