झारखण्ड राज्य में खनिज एवं वन संपदाओं की अकूत उपलब्धता के बावजूद आज भी यहाँ अधिसंख्य ग्रामीण आवादी कृषि से संबंधित अन्य छोटे-छोटे कार्यो के सहारे की जीवन गमन करते हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, झारखण्ड, राँची का मुख्य कार्य भूमि का प्रबंधन है। इस क्रम में सरकारी भूमि का प्रबंधन, सुरक्षा तथा समुचित उपयोग सुनिच्च्िचत किया जाता है, रैयती भूमि का प्रबंधन तथा रैयतों के अधिकारों की सुरक्षा पुनिच्च्िचत की जाती है। कृषि एवं कृषि से संबंधित अन्य आर्थिक गतिविधियॉ पीछे इस विभाग के कार्यमों में जुड़ी हुई है।
सरकारी एवं रैयती भूमि के प्रबंधन के क्रम में भूमि सुधार कार्यक्रमों का कार्यान्वयन, सिलिंग में प्राप्त अधिच्चेष भूमि भूमिहीनों के बीच उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने हेतु वितरण, सरकारी भूमि की कृषि कार्य हेतु भूमिहीनों के बीच बन्दोबस्ती, गृहविहिनों के लिए गृह सलि उपलब्ध कराया जाना, भुदान भूमि भूमिहीनों के बीच वितरण सुनिच्च्िचत कराना मुख्य कार्य है।
झारखण्ड राज्य में रैयती भूमि की सुरक्षा के लिए छोटानागपुर काच्च्तकारी अधिनियम 1908 तथा संथाल परगना काच्च्तकारी अधिनियम, 1994 लागू है, इनके तहत् आदिवासी रैयतों की भूमि की सुरक्षा के विच्चेष प्रावधान किये गये हैं।
भूमि सुधार कार्यक्रमों का कार्यान्वयन निष्ठापूर्वक / समय सीमा के अन्दर सुरिच्च्िचत कराकर गरीबों, आदिवासियों, अनुसूचित जातियों एवं सुयोग्य श्रेणी के भूमिहीनों की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए अभियान चलाकर उपर्युक्त कार्यक्रमों की कार्यान्वित किया जा रहा है।
भू-अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण एवं राज्य में भू-मानचित्रों को कम्प्यूटरीकरण (जी आई एस) के अंतर्गत उपलब्ध मानचित्रों के कम्प्यूटर फार्मेट में परिवर्तित कर भू-खंड से संबंधित समस्त आंकड़े एकीकृत करके संधारित किया जा रहा है। इसे इंटरनेट के माध्यम से अंचल एवं पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराया जायेगा।
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