1. विभागीय कार्य एवं प्रक्रियाः-
उत्पाद एवं मद्यनिषेध विभाग एक गैर योजना विभाग है जिसका मुख्य कार्य आम लोगों को अवैध एवं विषाक्त शराब के सेवन से रोकने के लिए शुद्ध शराब का उत्पादन, विनिर्माण करा कर निर्धारित माध्यम से क्रय-विक्रय कराना है तथा मदिरा की खपत पर नियंत्रण रखते हुए उत्पाद राजस्व की वसूली करना है। मद्य निषेध के क्षेत्र में ''मद्यपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है'' इस चेतावनी का प्रचार करते हुए 50 प्रतिशत एवं उससे अधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले पंचायत में मदिरा की दूकान खोलने पर प्रतिबंध को लागू किया जाना है।
झारखण्ड उत्पाद अधिनियम 1915, झारखण्ड छोआ नियंत्रण अधिनियम 1947, औषधीयों एवं प्रसाधन निर्मितियां (उत्पाद शुल्क) अधिनियम 1955 एवं स्वापक द्रव्य एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 द्वारा प्रदत्त अधिकार एवं कर्त्तव्यों के अधीन विभाग निम्नलिखित विषयों से संबंधित कार्यों का सम्पादन करते हुए सरकार एवं राजस्व पर्षद द्वारा निर्मित नियमों के आलोक एवं मार्गदर्शन में राजस्व उगाही का कार्य करता हैः-
(क) मानव उपयोग के लिए देशी, मसालेदार एवं विदेशी मदिरा का उत्पादन, विनिर्माण, परिवहन, विनियमित करानाः
(ख) अल्कोहल पर आधारित उद्योगों को दिये जानेवाले संशोधित सुषव/विकृत सुषव, जिसे इन्डस्ट्रीयल अल्कोहल भी कहा जाता है, के विनिर्माण, परिवहन, आयात, व्यवहार को नियंत्रित करना।
(ग) अफीम, भांग तथा अन्य स्वापक (नारकोटीक) पदार्थ अथवा स्वापक औषधीयों का जन मानव उपभोग के रूप में व्यवहार किया जा रहा हो तक उसे विनियमित करना एवं उससे राजस्व उगाही करना।
(घ) अल्कोहल अथवा स्वापक पदार्थ से युक्त औषधीय एवं प्रसाधन निर्मितियों का जन अल्कोहलिक पेय के रूप में उपभोग के व्यवहार किया जा रहा हो तब उसे विनियमित करना;
(ड़) छोआ उत्पादन, परिवहन, आयात, निर्यात को विनियमित करना, उसके व्यवहार को नियंत्रित कर उससे राजस्व की उगाही करना।
(च) विभाग में नियोजित पदाधिकारियों/ कर्मचारियों पर नियंत्रण एवं विभाग के दखल में स्थित सभी भवनों का प्रभार।
विभागीय कार्य सम्पादन में अपनायी जानेवाली प्रक्रिया वर्ष 1919 से अद्यतन निर्मित एवं संशोधित विभिन्न नियमावली में निरूपित है। तदनुसार, संक्षेप में नीति निर्धारण के मामले को छोड़कर अधिकांश कार्य कानून प्रदत्त अथवा प्रत्यायोजित शक्ति के अनुसार राजस्व पर्षद के मार्गदर्शन में आयुक्त उत्पाद तथा जिला उपायुक्त के माध्यम से सम्पादित होते हैं।
2. प्रशासनिक ढांचाः-
उत्पाद एवं मद्यनिषेध विभाग का प्रशासनिक ढांचा पद क्रमानुसार निम्नवत् हैः-
- आयुक्त उत्पाद-सह-सचिव
- उपायुक्त उत्पाद
- सहायक आयुक्त उत्पाद
- अधीक्षक उत्पाद
- निरीक्षक उत्पाद
- अवर निरीक्षक उत्पाद
- सहायक अवर निरीक्षक उत्पाद
- उत्पाद सिपाही
उत्पाद एवं मद्यनिषेध विभाग में आयुक्त उत्पाद-सह-सचिव के सहायतार्थ एव उपायुक्त उत्पाद (मुख्यालय), सहायक आयुक्त उत्पाद, (मुख्यालय) तथा एक अवर सचिव, दो प्रशाखा पदाधिकारी एवं पाँच सहायक एवं अन्य कनीय कर्मचारी कार्यरत् हैं। प्रमण्डलीय स्तर पर उत्तरी छोटानागपुर प्रमण्डल द0 छोटानागपुर-सह-पलामू-सह-कोल्हान प्रमण्डल एवं संथाल परगना प्रमण्डल के लिए उपायुक्त उत्पाद का एक-एक स्वीकृत एवं कार्यरत् है।
जिला उत्पाद प्रशासन, जिला उपायुक्तों के अधीन है, जिनके सहयोग के लिए राज्य में राँची, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, तथा पूर्वी सिंहभूम में सहायक आयुक्त उत्पाद के एक-एक पद स्वीकृत है एवं सभी पद कार्यरत हैं। गुमला, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम, गिरीडीह, देवघर, दुमका, साहेबगंज में अधीक्षक उत्पाद का एक-एक पद स्वीकृत एवं कार्यरत हैं। सम्प्रति राज्य में उत्पाद जिलों की संख्या केवल 12 है। राँची के साथ खूँटी, हजारीबाग जिला के साथ कोडरमा एवं चतरा, गुमला के साथ सिमडेगा एवं लोहरदग्गा, पलामू के साथ गढ़वा एवं लातेहार, पश्चिमी सिंहभूम के साथ सरायकेला-खरसावाँ, दुमका के साथ जामताड़ा एवं गोड्डा तथा साहेबगंज के साथ पाकुड़ जिला को संयुक्त प्रभार में रखा गया है। जिला में विभागीय कार्यों के सम्पादन हेतु निरीक्षक उत्पाद, अवर निरीक्षक उत्पाद, सहायक अवर निरीक्षक उत्पाद एवं उत्पाद सिपाही का पद स्वीकृत हैं राज्य में अनुमण्डल स्तर पर निरीक्षक उत्पाद के 33, अवर निरीक्षक उत्पाद के 113, सहायक अवर निरीक्षक उत्पाद के 91 तथा उत्पाद सिपाही के कुल 572 पद स्वीकृत है, जिसके विरूद्ध क्रमशः 22 निरीक्षक उत्पाद, 68 अवर निरीक्षक उत्पाद, 34 सहायक अवर निरीक्षक उत्पाद तथा 289 उत्पाद सिपाही कार्यरत हैं।
प्रशासनिक सुदृढीकरण एवं राजस्व हित में पाँच उत्पाद जिले यथा पाकुड़, सरायकेला-खरसावाँ, जामताड़ा, गड़वा, कोडरमा एवं एक मुख्यालय में एक-एक अधीक्षक उत्पाद एवं अन्य अनुसंगी पदों के सृजन की कार्रवाई प्रक्रियान्तर्गत है।
3. उत्पाद राजस्वः- उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग समय समय पर सरकार एवं राजस्व पर्षद द्वारा बनाये गये नियमों के आलोक एवं मार्गदर्शन में राजस्व उगाही का कार्य करता है।