| About the Department |
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झारखण्ड राज्य के प्रशासनिक ढाँचे में मंत्रिमण्डल सचिवालय एवं समन्वय विभाग मंत्रिपरिषद विषयक कार्य, मुख्यमंत्री सचिवालय एवं राज्यपाल सचिवालय विषयक स्थापना कार्य, महामहिम राज्यपाल की नियुक्ति संबंधी कार्य, माननीय मंत्रीगण की नियुक्ति एवं उनके बीच विभागों का आवंटन, उनकी परिलब्धियों, मंत्रियों के आप्त सचिवों की नियुक्ति, सरकारी संघों एवं महासंघों को मान्यता प्रदान करने, राष्ट्रीय एवं राजकीय समारोहों का आयोजन, भारत सरकार एवं अन्य राज्यों के महानुभावों को राज्य अतिथि घोषित करने एवं अन्य अनुवर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करना, राज्य अतिथिशाला तथा नई दिल्ली स्थित झारखण्ड भवन के प्रशासनिक नियंत्रण सहित विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करने, विशेष कर अन्तर्विभागीय मामलों में मार्गदर्शन एवं नेतृत्व करने की भूमिका का निर्वह्न करनेवाला एक प्रमुख एवं महत्वपूर्ण विभाग है, जो अपने गुरूत्तर दायित्वों का निर्वह्न पूर्ण तत्परता एवं समर्पण के साथ करते हुए अपने अस्तित्व की महत्ता को राज्य सृजन के दिन से ही स्वतः किया है।
- राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय के कार्य दायित्व एवं मंत्रिपरिषद की बैठकों के आयोजन इत्यादि से संबंधित कार्य इस विभाग को सुपुर्द होने के फलस्वरूप यह विभाग अग्रिम पंक्ति पर है। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग को आवंटित कार्यों की प्रकृति गैर योजना स्वरूप है। कार्यपालिका नियमावली के संदर्भित नियमों एवं तृतीय अनुसूची में उल्लिखित बिन्दुओं से संबंधित सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा मंत्रिपरिषद् की बैठक में ससमय उपस्थापन से संबंधित कार्रवाई इस विभाग द्वारा अत्यंत निष्ठा से कुशलतापूर्वक सम्पादित किया जाता है। ssss बैठकों के आयोजन के क्रम में इस विभाग ने अपने को पृष्ठभूमि में रख कर अपने दायित्व का निर्वहन किया है। विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद की बैठकों के संदर्भ में ससमय बैठक की कार्यसूची को तेयार करना इत्यादि इन सारे कार्यों को विभागीय स्तर पर त्रुटिहीन ढंग से सम्पादित किया गया है। इस सुपुर्द कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण भाव से कार्य सम्पादन का ही यह प्रतिफल रहा है कि मंत्रिपरिषद की बैठक के दिन और कई अवसरों पर बैठक के कुछ एक समय पूर्व प्राप्त संलेख प्रस्तावों के कार्यसूची में सम्मिलित हो जाने के कारण विभागीय स्तर पर संलेख प्रस्तावों के लम्बित रहने की स्थिति लगभग नगण्य रही है।
- मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग के महत्वपूर्ण कार्य दायित्वों में मंत्रिपरिषद की बैठक को भली-भांति आयोजित करने के साथ-साथ मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णयों का ससमय अनुपालन कराने एवं उससे जनसाधारण को अवगत कराने तथा उससे उन्हें लाभान्वित कराने के लिए प्रशासी विभाग को निरंतर उत्प्रेरित करने की महत्ती जिम्मेवारी का निर्वह्न निर्बाध रूप से इस विभाग द्वारा किया जाता रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों को रिकॉर्ड करते हुए बैठक के तुरंत बाद आयोजित प्रेस एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ ब्रिफिंग मीटिंग का आयोजन भी भली-भांति किया जाता रहा है। परिणामतः मंत्रिपरिषद की बैठक से संबंधित सभी निर्णयों को स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के समाचारपत्रों एवं दूरदर्शन के माध्यम से जनसाधारण को जानकारी समय पर दिया जाना सम्भव हो पाया है।
- सरकार की भावना के अनुरूप आधुनिक सूचना तकनीकी संसाधनों का उपयोग करतु हुए मंत्रिपरिषद की बैठकों से संबंधित समस्त सूचनाएँ वेबसाईट के माध्यम से तत्काल ही उपलब्ध करा दी जा रही है, जिससे प्रेस ब्रीफिंग में सम्मिलित सीमित पत्रकार बन्धुओं के अतिरिक्त व्यापक तौर पर अन्य महानुभावों के द्वारा भी जानकारी प्राप्त की जा रही है। इससे राज्य सरकार के प्रशासन की पारदर्शिता की वचनबद्धता निश्चित रूप से सुदृढ़ एवं स्थापित हुई है।
- मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग द्वारा समन्वयक विषयक कार्यों के अन्तर्गत न केवल सचिवालय स्तर पर अन्तर्विभागीय कार्यों के निष्पादन में महत्ती भूमिका का निर्वह्न किया जाता है बल्कि क्षेत्रीय कार्यालयों यथा-प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय, उपायुक्त कार्यालयों इत्यादि के साथ समन्वय स्थापित करने एवं सरकार की नीतियों एवं निदेशों से अवगत कराने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन भी किया जाता है। इस क्रम में प्रमंडलीय आयुक्त एवं उपायुक्तों की सामुहिक बैठक माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समय-समय पर आहूत की गयी है जिससे जहाँ एक ओर सरकार की नीतियों और लोक कल्याणकारी भावनाओं के प्रशासन के विभिन्न स्तरों को अवगत कराने एवं तदन्ररूप उसके त्वरित कार्यान्वयन में सुविधा हुई है, वहीं दूसरीं ओर, जनता की मूलभूत समस्याओं एवं उसके निराकरण के बुनियादी उपायों से भिज्ञ होने का भी अवसर मिला है। इस प्रकार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप इस व्यवस्था का लाभ और अधिक हो सकेगा।
- राज्य में कार्य संस्कृति को समुन्नत करने, विधि- व्यवस्था एवं प्रशासनिक तंत्र को दुरूस्त एवं सुदृढ़ करने तथा विकासोन्मुख योजनाओं का प्रभावशाली रूप से क्षेत्र में कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा सभी जिलों के उपायुक्त एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को क्षेत्र का दौरा करने क्षेत्रीय कायौलयों का निरीक्षण करने एवं मुख्यालय छोड़ने से पूर्व अनुमति प्राप्त करने के संबंध में विस्तृत निदेश दिये गये हैं। तत्संबंध में निर्गत आदेशों का मुख्य उद्देश्य यह है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ सुदूर एवं दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत आवश्यकताओं एवं वहाँ की कठिनाईयों से पदाधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप में साक्षात्कार किया जाय, स्थानीय समस्याओं से अवगत हुआ जाय एवं प्राप्त अनुभवों के आलोक में ऐसी प्रशासनिक व्यवस्थाएँ विन्यस्त किया जाय, जिससे सरकार द्वारा संचालित लोक कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ जनता को प्राप्त हो सके और जनता की समस्याओं का त्वरित निष्पादन स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित करते हुए जनता का सर्वांगीण विकास किया जा सके।
- भारत सरकार, केन्द्रीय मंत्रीगण, माननीय मुख्यमंत्री, एवं राज्यमंत्रीगण, माननीय सांसदों एवं विधायकों तथा अन्य महानुभावों से प्राप्त-पत्रों एवं वृत्तादेशों पर शीघ्रता से नियमानुसार सभी विभागों द्वारा कार्रवाई करने हेतु निदेश दिये गये हैं और तत्संबंध में शीघ्रता से कार्रवाई की जा सके। इसके लिये प्रक्रिया का सरल बनाते हुए सभी विभागों को निदेशित किया गया है कि वे अपने विभागों में उप सचिव से अन्यून स्तर के पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी के रूप में नियुक्त करें। तद्नुसार विभागों द्वारा अपने यहाँ नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति कर दी गयी।
- क्षेत्रीय अभिलेखागार का प्रशासनिक नियंत्रण मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग के अन्तर्गत है। अभिलेखागार में पदाधिकारियों/ कर्मवचारियों की अल्प संख्या के बावजूद क्षेत्रीय अभिलेखागार, राँची/ जिला अभिलेखागार, चाईबासा द्वारा अपने कार्यों एवं दायित्वों का सफल एवं सुव्यवस्थित सम्पादन किया जा रहा है। नवगठित झारखण्ड राज्य मे राज्यस्तरीय अभिलेखागार के गठन की आवश्यकता एवं महत्व को महसूस करते हुए पहल एवं प्रयास किये जा रहे है। भवन निर्माण विभाग से राज्य अभिलेखागार को अभिष्ठापित किये जाने हेतु एक अनुकूल भवन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जा रहा हे। भवन/स्थल प्राप्ति के पष्चात् राज्य स्तरीय अभिलेखागार की स्थापना हेतु आवश्यक संख्या में राजपत्रित/ अराजपत्रित कोटि के कार्मिकों के पदों के सृजन की कार्रवाई की जायेगी। राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा राँची क्षेत्रीय अभिलेखागार के अभिलेखों के संरक्षण एवं सम्बर्द्धन के लिये साहाय्य अनुदान भी प्रदान की जा रही है।
- लोक कल्याणकारी आदर्शों से प्रेरित झारखण्ड सरकार द्वारा जनता की आकांक्षाओं एवं उनके दिन-प्रतिदिन की कठिनाईयों का समुचित निराकरण शीघ्रता से करने एवं उनके प्राप्त आवेदनों पर ससमय नियमानुसार कार्रवाई करने हेतु ''जनशिकायत निवारण निदेशालय'' का गठन किया गया है। सम्प्रति जनशिकायत निवारण कोषांग के द्वारा महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय केन्द्रीय मंत्रीगण, माननीय सांसदों, माननीय मुख्यमंत्री, माननीय मंत्रीगण, माननीय विधायकगण एवं अन्य महानुभावों को जनता द्वारा अपनी समस्याओं से संबंधित सम्बोधन पत्रों एवं माहनुभावों द्वारा अनुशंसित बिन्दुओं के कार्यान्वयन के लिए गम्भीरतापूर्वक कार्य किये जा रहे हैं। इस क्रम में प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई करने हेतु सम्बन्धित विभागों एवं क्षेत्रीय कार्यालयों को निदेश दिये जाते हैं, दिये गये निदेश के अनुपालन की स्थिति का निरंतर मूल्यांकन एवं अनुश्रवण किया जाता है और कृत कार्रवाई से संबंधित आवेदनकत्ताओं को एवं महानुभावगण को भी अवगत कराया जाता है। विगत वर्षों में लगभग 50000 प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की गयी है। सरकार के इस कल्याणकारी एवं जनहितकारी कार्य से जनसाधारण लाभान्वित हो रहे हैं।
- माननीय उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका एवं अवमानना बाद के सम्बन्ध में वांछित अनुवर्त्ती कार्रवाई सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के परिप्रेक्ष्य में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग द्वारा व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं। माननीय उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर प्रतिशपथ-पत्र दायर करने, रिट याचिकाओं में पारित न्यायादेश के अनुरूप नियमानुसार वांछित अनुवर्ती कार्रवाई शीघ्रता से करने के सम्बन्ध में सरकार द्वारा सभी विभागों एवं क्षेत्रीय कार्यालयों को निदेश एवं मार्ग दर्शन दिये गये हैं। माननीय उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिकाओं के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि अधिकांश वाद व्यक्ति की निजी शिकायत यथा-प्रोन्नति, वरीयता, पेंशन इत्यादि मामलों से संबंधित होते हैं। यदि इन मामलों का निष्पादन नियमानुसार ओर ससमय कर दिया जाय तो न्यायालय में वादों की संख्या कम हो समती है। इस परिप्रेक्ष्य में सभी विभागों को सरकार द्वारा आदेशित किया गया है कि वे अपने विभागों से संबंधित इस प्रकार के मामलों के निष्पादन को सर्वोंच्च प्राथमिकता दें।
- अवमानना वाद के मामलों के द्रुतगति से सरकार के स्तर पर निष्पादन करने का निदेश भी सभी विभागों को दिया गया है। इस निदेश के क्रम में विभागों को आदेशित किया गया है कि रिट याचिकाओं के संबंध में प्रतिशपथ-पत्र शीघ्रता से दायर किया जाय, प्राप्त न्यायादेश का नियमानुसार अनुपालन निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत किया जाय, आवश्यकतानुसार अपील की जाय, ताकि अवमानना वाद की स्थिति ही उत्पन्न न हो।
- राज्य परिदर्शन पर आये राज्य अतिथियों के आवासन, परिवहन एवं सुरक्षा आदि की व्यवस्था सुचारू रूप से मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग द्वारा ही किया जाता है। राज्य में विकास की असीम सम्भावनाएँ होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पूँजी निवेशकों के अतिरिक्त देश के हर राज्यों के महानुभावों के राज्य परिदर्शन में काफी वृद्धि हो रही है। इन महानुभावों के प्रति समुचित सम्मान, सुरक्षा एवं उत्कृष्ट सौजन्यता प्रकट करने के क्रम में आने वाली व्यवहारिक कठिनाईयों के निराकरण एवं उच्च स्तरीय नयाचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग के अंतर्गत नयाचार निदेशालय (Protocol Directorate) के गठन का निर्णय लिया गया है और राँची, देवघर, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, धनबाद एवं हजारीबाग जिलों, जहाँ राज्य अतिथियों का अवागमन अधिक होता है, में नयाचार निदेशालय के नियंत्रणाधीन नयाचार कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है तथा उक्त कार्यालयों के कार्यान्वयन हेतु विभिन्न कोटि के कुल 104 पदों का सृजन किया गया है । राजधानी राँची में राज्य अतिथिशाला को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु भी विभिन्न कोटि के पद सृजित किये गये हैं । दिल्ली में राज्य सरकार की ओर से न्याचार के लिए समुचित व्यवस्था की गयी है। इस क्रम में नई दिल्ली स्थित झारखण्ड भवन एवं स्थानिक आयुक्त के कार्यालय को सुदृढ़ किया गया है।
- राज्य सरकार एवं केन्द्रीय सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से सम्पर्क कार्य करने, राज्य के महानुभावों का विदेश परिदर्शन एवं विदेशी आगंतुकों के राज्य परिदर्शन कार्यक्रम में सम्पर्क सूत्र का कार्य करने, राज्य के प्रतिनिधि के रूप में केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की बैठक में भाग लेने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का भली-भांति निर्वह्न नई दिल्ली स्थित स्थानिक आयुक्त कार्यालय द्वारा की जा रही है। राज्य की अपार खनिज सम्पदा एवं विस्तृत औद्योगिक संभावनाओं की जानकारी इस दृष्टि से उपलब्ध कराये जाने, जिससे कि राज्य में पूँजी निवेश की सम्भावना विकसित हो और राज्य को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्टीय स्तर पर पहचान बने के प्रयोजनार्थ विशेष प्रतिनिधि कार्यरत हैं।
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